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Friday, 18 July 2014

विवेकानंद


उस वक़्त की होगी , तस्वीर ये
सिर्फ़ होंगे नरेंद्र, आप जब
सिर पर कोई शिमला नहीं
और लिबास भी गेरुआ नहीं
कुछ है .. पर
मिलता है जो “आज” से

वो जो है ,“आनंद” है वो
वो जो है ,“विवेक” है वो
ख़ामोश है तस्वीर ये
पर ये आँखें आपकी ..
ये देखती बहुत हैं
मैं सोच में पड़ जाती हूँ  
कैसे बना लिया आपने
तस्वीर को ही क़िरदार अपना
क्यूकि मुझे भी पसंद हैं
मेरी एक तस्वीर बहुत ...